Sad Shayari || Badmashi Dia
फिदा हुएथे तेरी मासूमित देख कर ।
यार तुम तो बेरहम निकले।
और जान देने की बात करते थे ना।
मेरी जान। फिर कियूँ तुम बदल गए
मेरे चरित्र पर दाग न लगे,
इसलिए कीचड़ से बचकर चलता हूँ।
खानदानी रगों में खून है हमारा,
इसीलिए सिर झुकाकर नहीं,
सीना तानकर चलता हूँ।
गैरों की तरह देखते है वो।
जो कभी अपने हुआ करते थे।
दूसरे का दिल तोड़ के ।
तीसरे के दिल मे धड़कते है वो।
मर्द हो तो मर्दानगी वाली बात किया करो।
ये नामर्दो की तरह काना फुसी मत किया करो।
और चादर जितनी हो उतना ही पर फैलाया करो।
ये दूसरे की गाड़ी पे बैठ कर । स्टोरी मत लगाया करो
गाड़ी यार की हो या रिस्तेदारकी।
कुछ लोग स्नेप तो ऐसे बनाते है।
जैसे खुद के बाप की हो।
मजबूर हूँ फेमली के वजह से ।
इस लिए किसी लाफ़डे मैं नही पड़ता।
और चुप रहना मेरी मजबूरी है।
वरना मैं तेरे पूरे खानदान से नही डरता ।
जो मेरे खुशी मैं शामिल होने का शोक रक्खे।
और गम मैं शामिल होना जरूरी समझे।
उसे मैं यार मानता हूँ।
मेरी बुराई मेरे मुंह पे करना।
पीठ पीछे करने वालोँ को। गद्दार मानता हूं।
लोग हाल पूछेंगे ऐसा हुलिया बनाऊंगा।
करके मेहनत की भट्ठी मैं काम। नाम बनाऊंगा।
लोग पैसा देख के रिश्ता निभाते है ना।
तो अब सिर्फ पैसों को मुंह लगाऊंगा।

